भारत की प्रमुख स्वतंत्र संस्थाओं के नाम और वर्तमान अध्यक्षों की सूची |Major Independent Institutions of India in Hindi

भारत की प्रमुख स्वतंत्र संस्थाएं और उनके वर्तमान अध्यक्ष: (Major Independent Institutions of India in Hindi)
भारतीय संविधान द्वारा देश में न्यायिक, लोकतान्त्रिक और राजनीतिक सुरक्षा के मददेनजर बहुत सी स्वतंत्र संस्थाओं की स्थापना की गई है। यहां पर भारत की प्रमुख स्वतंत्र संस्थाओं की सूची दी गई हैं। सामान्यतः भारत की प्रमुख स्वतंत्र संस्थाओं से सम्बंधित प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते है। यदि आप विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे: आईएएस, शिक्षक, यूपीएससी, पीसीएस, एसएससी, बैंक, एमबीए एवं अन्य सरकारी नौकरियों के लिए तैयारी कर रहे हैं, तो आपको देश की प्रमुख स्वतंत्र संस्थाओं के बारे में अवश्य पता होना चाहिए।

जन लोकपाल भी ऐसी ही एक स्वतंत्र संस्था है जिसको लेकर अबतक जन-आंदोलन जारी है। आइए जानते हैं कि भारत की महत्वपूर्ण स्वतंत्र संस्थाओं (स्वायत्त संस्थाएं) के बारे में:-
1. नीति आयोग (योजना आयोग) (Planning Commission of India):
नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) भारत सरकार द्वारा गठित एक नया संस्थान है जिसे योजना आयोग के स्थान पर बनाया गया है। 1 जनवरी 2015 को इस नए संस्थान के संबंध में जानकारी देने वाला मंत्रिमंडल का प्रस्ताव जारी किया गया। यह संस्थान सरकार के थिंक टैंक के रूप में सेवाएं प्रदान करेगा और उसे निर्देशात्मक एवं नीतिगत गतिशीलता प्रदान करेगा। नीति आयोग, केन्द्र और राज्य स्तरों पर सरकार को नीति के प्रमुख कारकों के संबंध में प्रासंगिक महत्वपूर्ण एवं तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराएगा।नीति आयोग के वर्तमान अध्यक्ष नरेन्द्र मोदी हैं।
2. भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India):
भारतीय चुनाव आयोग एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्था है। वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति हैं। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी, 1950 को की गई थी। इसका गठन भारत में स्तवंत्र एवं निष्पक्ष रूप से प्रतिनिधिक संस्थानों में जन प्रतिनिधि चुनने के लिए किया गया था।
3. संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission):
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) भारत के संविधान द्वारा स्थापित एक ऐसी संस्था है जो भारत सरकार के लोक सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति के लिए परीक्षाएं संचालित करती है। प्रोफेसर डेविड आर. सिम्लिह संघ लोक सेवा आयोग के वर्तमान अध्यक्ष हैं। प्रथम लोक सेवा आयोग की स्थापना 01 अक्टूबर, 1926 को हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 315-323 में एक संघीय लोक सेवा आयोग और राज्यों के लिए राज्य लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान है।

4. राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women, NCW):
राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन जनवरी 1992 में एक संवैधानिक निकाय के रूप में किया गया था। राष्ट्रीय महिला आयोग की वर्तमान अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम है। इस आयोग की पहली अध्यक्ष जयंती पटनायक थीं।महिला आयोग का काम महिलाओं के संवैधानिक हित और उनके लिए कानूनी सुरक्षा उपायों को लागू करना होता है।
5. केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission):
भारत सरकार ने अपने नागरिकों के जीवन को सहज, सुचारु रखने और देश को पूरी तरह लोकतांत्रिक बनाने और सरकारी पारदर्शिता के लिए आरटीआई अधिनियम स्थापित किया। वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त आर.के. माथुर है। केंद्रीय सूचना आयोग का गठन 2005 में किया गया। राइट टू इन्फॉरमेशन (आरटीआई) का अर्थ है सूचना का अधिकार और इसे संविधान की धारा 19 (1) के तहत एक मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है। आरटीआई के तहत हर नागरिक को यह जानने का अधिकार है कि सरकार कैसे कार्य करती है।
6. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission for Minorities):
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम-1992 के तहत किया। इसका गठन पांच धार्मिक अल्पसंख्यकों मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्व एवं पारसी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए किया गया है। आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पांच सदस्य होते हैं जो अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के वर्तमान अध्यक्ष सैयद गय्यूर उल-हसन रिजवी हैं। आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, मणिपुर, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल में भी राज्य अल्पसंख्यक आयोगों का गठन किया गया है। इन आयोगों के कार्यालय राज्यों की राजधानियों में स्थित हैं।
7. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India)
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कंट्रोलर एण्ड ऑडिटर जनरल) को आम तौर पर कैग के नाम से जाना जाता है। भारत के वर्तमान नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) शशि कान्त शर्मा हैं। वह देश के 12वें कैग हैं। 1948 में पहले कैग वी. नरहरि राव बने थे। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 में कैग का प्रावधान है, जो केंद्र व राज्य सरकारों के विभागों और उनके द्वारा नियंत्रित संस्थानों के आय-व्यय की जांच करती है। यही संस्था सार्वजनिक धन की बरबादी के मामलों को समय-समय पर प्रकाश में लाती है।


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